नाम वापसी के बाद साफ होगी तस्वीर
खानपुर। नगर पालिका चुनाव 2026 को लेकर खानपुर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन सोमवार को नगर पालिका कार्यालय में दिनभर प्रत्याशियों और समर्थकों की भीड़ रही। अंतिम दिन कुल 127 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। इसके साथ ही 25 वार्डों के लिए कुल दावेदारों की संख्या 150 के पार पहुंच गई है।
नामांकन के अंतिम दिन सुबह से ही नगर पालिका कार्यालय में प्रत्याशियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। समर्थकों के साथ पहुंचे उम्मीदवारों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने पर्चे दाखिल किए। इस दौरान कई वार्डों में टिकट की दौड़ से बाहर हुए दावेदारों ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर प्रमुख राजनीतिक दलों के सामने चुनौती खड़ी कर दी।
भाजपा-कांग्रेस ने जारी की अंतिम सूची
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने से ठीक पहले भाजपा और कांग्रेस ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी। दोनों दलों ने नगर पालिका के सभी 25 वार्डों में प्रत्याशी उतारे हैं। प्रत्याशियों को संबंधित पार्टी के चुनाव चिन्ह भी उपलब्ध करा दिए गए हैं। इसके बाद दोनों प्रमुख दलों का चुनावी मुकाबला सीधे तौर पर मैदान में दिखाई देने लगा है।
बागियों ने बढ़ाई दोनों दलों की चिंता
टिकट वितरण के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में असंतोष के स्वर भी सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार दोनों दलों से 15-15 से अधिक बागी प्रत्याशी निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए हैं। ऐसे में कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी से मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने की संभावना बन गई है।
नाम वापसी के बाद बदलेगा समीकरण
नामांकन दाखिल होने के बाद अब प्रशासन की ओर से नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद 2 सितंबर तक प्रत्याशी अपने नाम वापस ले सकेंगे। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रत्येक वार्ड में चुनाव मैदान में बचे प्रत्याशियों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
किसके पक्ष में जाएगा पालिका का फैसला?
खानपुर में चुनावी गतिविधियां अब तेज हो गई हैं। भाजपा और कांग्रेस ने सभी वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को सीधा करने की कोशिश की है, वहीं बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान में आने से दोनों दलों के सामने चुनौती बढ़ गई है। अब नजरें नाम वापसी पर टिकी हैं। इसके बाद ही साफ होगा कि कितने वार्डों में सीधा मुकाबला रहेगा और कितने वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी समीकरण प्रभावित करेंगे।






